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Thursday, 28 May 2020

आधुनिक स्त्री सक्षमीकरण

आधुनिक स्त्री सक्षमीकरण
ढोल, गंवार, शुद्र, पशु, नारी,
सब है ताड़न के अधिकारी।
एक काल में ऐसा कहने वाले कवि आज होते तो शायद उन्हें अपने कहने पर पछतावा होता।
जब स्त्री जाति को अबला कहा जाता है तो निश्चित ही यह कथन उनकी दयनीय स्थिति को बयान करता दिखाई देता है। क्या स्त्रियां सचमुच दया के योग्य है?
क्या ईश्वर ने स्त्रियों को सचमुच अबला रूप में उत्पन्न किया है? यह सवाल समाज में लंबे समय से उठाए जा रहे हैं।
स्त्रियों की शरीर रचना में पुरुषों जैसी कठोरता नहीं है क्योंकि प्रकृति ने उसे सौंदर्य का प्रतीक मानकर शारीरिक कोमलता प्रदान की है। वही कोमल, अबला स्त्री ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्वयं को हर कार्य के लिए सक्षम सिद्ध किया है।
आज की नारी अर्धांगिनी नहीं बल्कि पूर्णांगिनी है और इस तथ्य को वह विविध रूपों में सिद्ध कर चुकी है। वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं बचा है, जहां नारी का पदार्पण ना हो चुका हो। आज की नारी सर्वसामान्य पदों से लेकर उच्चतम पदों पर आसीन होकर अपने दायित्व का सफल निर्वाह कर रही है। उसकी सेवा और योग्यता किसी भी तरह से पुरुषों से कमतर नहीं है। आज की नारियां स्वच्छंद रूप से तथा अपने बलबूते उद्योग, व्यवसाय, कल कारखाने तथा अन्य प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी दक्षता के साथ संचालित कर रही है।

नारी की शारीरिक शक्ति पुरुषों की तुलना में कम होने का मतलब यह नहीं कि वे कमजोर और अबला है। शारीरिक शक्ति कम होते हुए भी उन्हें धैर्य अधिक है। फलत: वे तनाव का कम शिकार होती हैं। पुरुषों की तुलना में स्त्रियां ह्रदय रोग से कम पीड़ित होती है।वे अहंकार और पद की दौड़ में नहीं लगी रहती।
मीराबाई ने प्रेम के मार्ग को चुनकर नारी स्वतंत्रता का एक अनोखा मार्ग दिखाया।
आज के युग में नारियों की भूमिका बदलती दिखाई दे रही है। वे सभी सामाजिक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आतुर दिखाई दे रही हैैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कला, राजनीति, विज्ञान आदि दुनिया का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां स्त्रियों ने अपनी पहुंच न बनाई हो। अब तो पुलिस विभाग में भी महिलाएं हैं तथा सफलतापूर्वक कानून और व्यवस्था को संभाल रही हैं। इस क्षेत्र में महिला पुलिस अधिकारी किरण बेदी का नाम बड़े गर्व से लिया जाता है। भारतीय महिला इंदिरा गांधी का नाम दुनिया में कौन नहीं जानता ? जिन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि सत्ता के शीर्ष पर महिलाएं उतनी ही सफल हैं। उनका एक लंबे समय तक भारतीय राजनीति में छाए रहना यह सिद्ध करता है कि नारियों में भी देश संचालन की क्षमता भरपूर है। सोनिया गांधी, सुषमा स्वराज, मेनका गांधी, बेनजीर भुट्टो, स्मृति ईरानी आदि कई ऐसे नाम है जिन्हें हम भूल नहीं सकते।
अस्पतालों से यदि नर्सों को हटा दिया जाए तो पूरी दुनिया की स्वास्थ्य सेवा तत्काल थप्पड़ जाएगी। मनोरंजन, उद्योग में स्त्रियों की भागीदारी को अनदेखा नहीं किया जा सकता। महिलाएं अंतरिक्ष अभियान में भी साझीदार बनी है। इन क्षमताओं को देखते हुए यह कैसे कहा जा सकता है कि अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी आंचल में है दूध, आंखों में पानी।
समाजशास्त्री कहते हैं कि नारी पुरुषों के साथ सहयोग करें तो ठीक है, लेकिन प्रतियोगिता करें, तो यह गलत है। आधुनिक नारी, पुरुषों से प्रतियोगिता नहीं कर रही। वह तो उसके कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना चाहती है। जिससे परिवार, समाज, देश का विकास हो। देश के हित में अपना योगदान देना चाहती है। नृत्य, संगीत, कला, लेखन आदि क्षेत्रों में अपनी भूमिका को आगे बढ़ाना चाहती है।

आधुनिक नारी को नौकरी करने, अपना व्यवसाय करने, राजनीति में भाग लेने, घूमने- फिरने आदि की पूरी आजादी मिली हुई है। भारतीय संविधान में प्रदत्त अधिकारों के तहत को कुप्रथाओं का अंत कर दिया गया है। समाज की सोच भी स्त्रियों के बारे में उदार हुई है। परंतु सामाजिक परिवर्तनों का लाभ अधिकतर पढ़ी-लिखी महिलाएं ही उठा पा रही है। निर्धन, अशिक्षित तथा असहाय स्त्रियों का एक तबका आज भी अपने अधिकारों के बारे में अनभिज्ञ है।
सरकार द्वारा चलाए गए विभिन्न कार्यक्रम जैसे बेटी पढ़ी, प्रगति हुई। बेटी बचाओ, देश बचाओ। आदि के द्वारा नारी के सशक्तिकरण को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।
आधुनिक स्त्री सक्षम है। हर कार्य को करने के लिए। वह केवल मंदिर की देवी बनकर नहीं रहना चाहती।
 उसने अपनी छवि बदली है। वह घर- बाहर की दोहरी भूमिका निभा रही है। उसे छोटा या ओछा कहना या कमजोर मानना, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सही नहीं है। आत्मरक्षा का कवच पहनकर वो कैब चलाती है, तो जहाज भी उड़ा लेती है।
उसने अपनी भूमिका में जो बदलाव लाया है, वह सराहनीय है। आधुनिक समय में उसकी  सक्षमता पर कोई प्रश्र चिन्ह नहीं लगा सकता। वह एवरेस्ट की चोटी पर तो अपने पांव रख ही आई है, चंद्रलोक की यात्रा भी कर आई है।
प्रसाद जी ने कहा है- 
नारी तुम केवल श्रद्धा हो,
विश्वास रजत नग पग तल में।
पीयूष स्रोत सी बहा करो,
जीवन के सुंदर समतल में।
                              राजेश्री गुप्ता

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