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Friday, 8 May 2020

आदमी

आदमी
महसूस किया है,इक सहर को
कि आदमी मोहताज नहीं है।
ईश्वर की इस कृति का, कोई सरोताज नहीं है।
चढ़ हिमालय पर उसने, साबित यही किया
कि अब वह कभी लाचार नहीं है।
पौरुष है उसके पास, है दिमाग भी इसलिए
संसार में जो उससे जीते,
वह आदमी अभी तैयार नहीं है।
ब्रह्मा को अपनी कृति पर नाज़ है बड़ा
इसलिए आदमी अवगुणों से भी भरा
अहंकार शिरोमणि का ताज भी गढ़ा
रावण भी इसलिए ही मरा ।
सर्वोत्तम पुरुषोत्तम राम है
इसलिए वह इंसान, इंसान हैं,
जो सद्गुणो की खान है।
                           राजेश्री गुप्ता बनिया

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