गुरुवार, 6 अगस्त 2020

खेत

खेत
आज राशन की लाइन में खड़े हुए,
ध्यान दुकान पर था लगा हुआ।
बेचैनी बढ़ रही थी,
धूप तेज और तेज हो रही थी।
माथे पर शिकन गहरा रही थी।
तभी राशन वाले ने कहा,
राशन खत्म हो गया।
आज भी कल की तरह,
खाली हाथ जाना होगा,
बच्चों को आज भी,
भूखा ही सो जाना होगा।
चिंता बेचैनी बढ़ रही थी,
अफसोस गहरा रहा था,
मैंने खेत क्यों बेच दिए,
हाय ! मैंने खेत क्यों बेच दिए।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें